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Intellectual

संघर्ष

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कुछ किरणें ही काफ़ी होती है,
ठंडक को मिटाने में,
कुछ बातें ही अज़ीज़ होती हैं,
ग़म को भुलाने में,
जब निकल पड़ती हूं यादों के सम्मेलन में,
कुछ हक़ीक़त काफ़ी होते हैं,
दिल को फिरसे ज़िंदा करने में।।

बड़ी गहराई है बीते पलों की,
रूबरू हुए थोड़ा खुद से,
जाना थोड़ा और अस्तित्व को अपने,
फिर लगा, जिंदगी भी कम है खुद को जानने में।।

हर मोड़ एक नई दिशा देती है,
हम बेहतर बनें शायद यह सिखलाती है,
पहिए रफ़्तार के बड़े दुरुस्त हैं,
हम पीछे रह जातें हैं,
और ज़िंदगी आगे निकल जाती है।।

थोड़ा ठहर जाऊं,
मन करता है, थोड़ा संभल जाऊं,
हर नज़रिए को परखने की आदत नहीं है,
सही को सही और गलत को गलत कहने की जुर्रत मैं भी कर पाऊं।।

वास्तविकता भी अजीब है,
रोज़ मिलती है पर अपनी नहीं लगती,
सपनों की कहानी ही अलग है,
एक झूठ ही है पर जो हमें उम्मीदें भी देती।।

ख़ूबसूरती भी खामियों में है,
ऐसा दिल को महसूस हुआ,
लिबास भी वहीं पहनते हैं,
कमियों ने हमेशा जिन को छुआ,
उत्तीर्ण होने में शाबाशी क्यों,
और चूक जाने में रुसवाई क्यों,
जब देखा चारों तरफ़ अपने,
लगा कि जीवन को संघर्ष कहा क्यों??

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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2 Comments

2 Comments

  1. Charu parashar

    December 27, 2020 at 2:12 PM

    Wow ..just wow

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