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The 90’s Kid

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खुश किस्मत हूं मैं मैंने 90’s के नजारे देखें है
मैंने होली के असली रंगों से खेला है
मैंने बचपन में बगीचों में झूला झूला है
मैंने आसमां में लाखों तारे देखे हैं मैंने खिलकर चहचहाते चेहरे हजारों देखे हैं
खुश किस्मत हूं मैं मैंने 90’s के नजारे देखें है

मैंने दिवाली की पूजा के बाद पटाखों की खुशी देखी है
मैंने बिजली जाने के बाद वाली खेली छुपन छुपाई की हंसी देखी है
मैंने टीवी रिमोट को लेकर हुई बहन भाई की लड़ाई देखी है
मैंने वह बाहर खेलने की जिद करने वाली पिटाई देखी है
खुश किस्मत हूं मैं मैंने 90’s की नजारे देखे हैं

और आज वह हंसी कहीं खो सी गई है
आज वह त्यौहार की रौनक नहीं रही है
और देखा है मैंने आज के उभरते सितारों को
फिर से दिल से आवाज आती है
खुश किस्मत हूं मैं मैंने 90’s के नजारे देखे हैं
मैंने 90’s के नजारे देखें हैं।।

 

Suman Mishra

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10 Comments

10 Comments

  1. Harpreet

    April 5, 2020 at 2:29 PM

    Its veru true and toching poetry ☺

  2. Mini

    April 5, 2020 at 2:48 PM

    Wow nice poem and nice write.i really enjoyed the work of yours, I look forward to reading and enjoying more of ur thoughts put to paper…..love mini

  3. Anonymous

    April 5, 2020 at 4:05 PM

    Awsss…..smmmmmmmmm……

  4. Anonymous

    April 5, 2020 at 6:47 PM

    Beautiful poem

  5. Dipali Datta

    April 5, 2020 at 6:47 PM

    Beautiful

    • Jahnabee

      April 6, 2020 at 3:34 PM

      Thankew @Dipali Datta☺️

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