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कुदरत का बदला

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लगता कुदरत ने लिया कोई बदला है,
क्यों मेरे आस-पास सब बदला-बदला है।।
क्यों खो गई वो ट्रैफिक वाली गाड़ियां,
क्यों बंद है अब रातों की पार्टी वाली चिंगारियां ,
क्यों किसी को जल्दी नहीं आज काम की,
क्यों पहले सी सुबह नहीं इस शाम की,
लगता कुदरत ने लिया कोई बदला है
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है ।।

क्यों चिड़ियों का चहचहाना आज तेज है,
क्यों इंसान की रफ्तार में आज परहेज है,
क्यों खामोश आज सब गलियां है,
क्यों खिलखिलाती हर रोज बागीचो में नई कलियां है,
क्या कुदरत ने लिया कोई बदला है,
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है।।

क्यों नहीं हो रहा शोर बाजारों में,
क्यों नहीं छप रहे तमाशे आज अखबारों में,
क्यों बंद है हर गली हर शहर हर कोना है,
एक नया सा डर सता रहा जिसका नाम कह रहे लोग करोना है,
क्यों डर घुटन पछतावा है, क्यों हर जगह मातम छाया है,
लगता जैसे गलती हो इंसान की, पर प्रकृति पर अलग ही खुमार छाया है,
क्यों समझ ना आ रहा अब यह मसला है
कि मेरे आस-पास क्यों सब बदला बदला है,
लगता कुदरत ने लिया कोई बदला है
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है
क्यों मेरे आस-पास सब बदला बदला है।।

Suman Mishra

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