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Anshula Thakur

गाथा नारी की

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नारी है सृष्टि का आधार
मत अबला सोच इसे
देश के रणबांकुरे हैं
इसी के गर्भ में पले

नहीं है तेरी आँखों में सम्मान
तो नजरें अपनी नीचे कर ले
प्रेम की पराकाष्ठा है गौरी
तो क्रोध की ज्वाला काली है

चाहे किया हो शोषण कितना
आज फिर भी सर उठाये खड़ी है
अपशब्द कहने से पहले सोच जरा
स्त्री किसी रूप में तुझसे भी जुड़ी है

माँ बिन संसार नहीं
बहन बिटिया बिन तीज त्यौहार नहीं
दोस्त बिन मुसकान नहीं
प्रेयसी बिन प्रेम नहीं पत्नी बिन सम्मान नहीं

किस रूप को तू धिक्कार रहा है
माँ का गर्भ तेरा भी आधार रहा है
माँ के सामने माँ को गाली निकाल जाते हो
अपने घर की औरतों को चारदीवारी में रख
खुद दरवाजा कहीं और का खटखटाते हो
टिप्पणी करने से पहले सोच जरा
तू खुद कितना पाक पवित्र है???

 

Anshula Thakur

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