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मुझे तलब है

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“कुछ पंक्तियां उन लोगों के लिए जो इस समय अपने घर से दूर फंसे हैं, महीनों से घर नहीं गए क्योंकि शायद मार्च क्लोजिंग करवानी थी और सोचा था अप्रैल में छुट्टियां लेकर घर जाकर फैमिली के साथ समय बिताएंगे , लेकिन इस करोना की वजह से जो जहां था वहीं फस गया।“

 

आज फिर हुआ एलान इस लॉकडॉउन को बढ़ाने का,
अब कौन समझाए,
कि लॉकडॉउन बढ़ने की चिंता नहीं है मुझे,
तलब है अपने घर जाने की,
मुझे तलब है मां के हाथ का खाना खाने की,
मुझे तलब है पापा साथ बैठ गप्पे लड़ाने की,
मुझे तलब है भाई-बहन साथ,
बचपन की यादें ताजा कर लड़ने लड़ाने की,
कि हां मुझे तलब है घर आए अपने,
२ बरस के भांजे को गोदी में खिलाने की,
और आज फिर हुआ एलान इस लॉकडॉउन को बढ़ाने का।।

कि मुझे है तलब ऑफिस जाने की,
मुझे तलब है यारों संग मिलने मिलाने की,
मुझे तलब है घूमने के प्लान बनाने की,
हां मुझे है तलब टपरी वाली चाय और मट्ठी,
ऑफिस के यारों के संग खाने की,
और आज फिर हुआ है एलान इस लॉकडॉउन को बढ़ाने का।।

मुझे है तलब अभी और जिंदगी जीने की,
मुझे तलब है अभी और नया सीखने की,
मुझे तलब है एक नई शुरुआत की,
कि मुझे है तलब अभी जिंदगी के,
कई अनदेखे पन्ने पलटने की,
हर रोज नया कुछ करने की
हर रोज नया कुछ सीखने की
हर रोज नया कुछ परखने की,
मुझे तलब है कुछ और नया करने की,
लेकिन आज फिर हुआ ऐलान इस लॉकडॉउन को बढ़ाने का,
आज फिर हुआ ऐलान इस लॉकडॉउन को बढ़ाने का।।

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