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Anshula Thakur

जिस्मानी मोहब्बत

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उस रात जहाँ जिस्म ले गए थे अपना ,
रूह भी वहीं छोड़ आते तो कितना अच्छा होता
मोहब्बत जरूरत आदत या फितूर था तुम्हारा
जो तुमने बंद कमरों में किया,
मोहब्बत ज़रा पाकीजा सी निभाते तो कितना अच्छा होता। ।

हर वो रिश्ता जो मजबूरी में बनाया तुमने ,
ना वक्त मजबूरी वाला तुम लाते तो कितना अच्छा होता,
हर कोई शख्स अपने दिल में अरमान लिए फिरता है ,
किसी के अरमानों को ना जलाते तो कितना अच्छा होता। ।

तुम्हारे फ़रेब के लिए किसी ने अपना प्यार बहाया,
एकबार सब सच कहा होता तो कितना अच्छा होता,
खुद के सुकून को मोहब्बत का नाम दे दिया,
यूँ मोहब्बत के नाम पर, ना खुद की हवस मिटाते
तो कितना अच्छा होता,
मोहब्बत ज़रा पाकीजा सी निभाते तो कितना अच्छा होता। ।

Anshula Thakur

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1 Comment

1 Comment

  1. Anonymous

    April 24, 2020 at 9:20 PM

    Bhut Khoobsurat

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