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Charu Parashar

एक शब्द

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ये शब्दो का खेल है
यहां शब्द ही महान है
शब्द सही चुन सको तो
ज़िन्दगी गुलिस्तां है
शब्द का चुनाव ही
इंसान की पहचान है

शब्द बनाता है तो बिगड़ता भी शब्द है
सोच सही हो अगर निखारता भी शब्द है
शब्द की ताकत को कम ना समझना कभी
इसी के चुनाव से तुम आज खड़े हो यहीं

शब्द अगर उत्साहित करता,
धमकी बन डराता भी शब्द है
शब्द की महानता यही
जो तुमने चुन लिया सही
तो सोच लो तुम हो वही पोरस
जिस से सिकंदर भी था कांपता
शब्द अगर गुरबाणी हो तो
राह भी है दिखलाता

शब्द ही इंसान के वजूद की पहचान है
शब्द ही इंसान का असली इम्तिहान है
वाणी को हैं कोसते हम, शब्द जब खुद के गलत
क्या होगा पछतावा करके अब,
अपने शब्द से इंसान तू ना पलट

तुम याद करो उस युग को
जहां बाण चले शब्दों के
मंथरा ने बनवास रचाया
कृष्ण से बरसे गीता के गीत
जहां सौंवे शब्द के चुनाव से
कट गया शिशुपाल का शीश

अर्थात
ये शब्दों का खेल है
यहां शब्द ही महान है
शब्द का चुनाव ही
इंसान की पहचान है

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1 Comment

1 Comment

  1. Rony

    May 22, 2020 at 2:25 AM

    You did it perfectly..Describing one word in many ways and making a poem on it means alot .. you are fab. Keep it up

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