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Romance

बिरहा

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कभी तब्बज्जो में किसीकी आके देखो,
बड़े गहरे सन्नाटे हैं मोहब्बत में,
कोई इश्क़ में मुकम्मल होके भी अधूरा है,
किसीको कुछ पलों का साथ भी गवारा है।।

लफ्ज़ बड़े अजीज़ होते है दीवानों के,
प्यार में नहीं दूरियों में इज़हार होते हैं,
तकल्लुफ़ करदे जो थोड़ी वक्त रहते,
कई जन्मों के हिसाब क्षण में होते हैं।।

हैरत-ए-जिंदगी कुछ तो बयां करदे,
लुका छुपी का आलम अब तो ख़त्म करदे,
वक्त बेवक्त याद जो आती तेरी,
यह रस ज़रा उसको भी चखा दे।।

हर सितम तेरा जता जाता है,
कि मोहब्बत इतनी मुतमइन क्यों नहीं होती,
रेशमी धागों से बुने ये यादें,
एक गर्म चादर सी हमेशा लगती।।

जब सुर्ख होठों पर तेरी बात आती है,
आंखों में सिर्फ़ शफ़क़त रह जाती है,
फ़िराक सी है दिल में कहीं,
थोड़ी बेबसी इधर भी है, थोड़ी बेबसी उधर भी।।

मौसम मानों पलों में बदल रहें,
कभी धूप तो कभी छांव ला रहे,
गुज़र रही जिंदगी भी रफ़्तार में,
बस कहीं ख़ुद में हम ही थम गए।।

बिरहा की रात जाने कब जाएगी,
पतझड़ ही है जाने बसंत फिर कब आएगी,
यक़ीन हो चला है इस ठहरें हुए मौसम का,
इसीलिए हंस लेते हैं आजकल हम अपनें गम में भी।।

शिकायत जो की कभी बेरुखी होने की,
दर्द भी सलाम करता है यू कठोर दिल रखने की,
हर किसी को ऐसा महबूब नहीं मिलता जनाब,
रुलाकर भी मोहब्बत जता जाने की।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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2 Comments

2 Comments

  1. Sanjeev Sharma

    January 15, 2021 at 7:41 PM

    I like the most these lines.

    हैरत-ए-जिंदगी कुछ तो बयां करदे,
    लुका छुपी का आलम अब तो ख़त्म करदे,
    वक्त बेवक्त याद जो आती तेरी,
    यह रस ज़रा उसको भी चखा दे।।

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