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Romance

इश्क सूफियाँना

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Ishq Sufiana

मंज़िल नहीं,
मेरा सफ़र है तू ,
कहीं पहुँचनें का इंतज़ार नहीं,
हमेशा साथ है तू,
रिश्ता नहीं दाे दिलों का ये,
रूह को छुआ जिसने वो एहसास है तू |

सूफी इश्कनामा इसका,
मुुर्शिद है हर पन्ना,
झुकता है सर मेरा,
जब करु मैं तेरा सजदा,
शामिल होता है दुअा में मेरी,
आँखें झुकती जब इबादत में तेरी,
यकीन होता उस खुदा पे और,
देखने के लिए जब आँखें खुलती|

बातें नही,
अभिलाषा मेरी,
एक पल बिना तेरे,
कर देता मीलो की दूरी,
हर मौसम को जीना है यूहीं,
फिर क्या सावन और क्या ताप ग्रीष्म की|

प्रकाश करते निर्मलता तेरी,
मासूमियत बयान करती आँखें,
इस जीवन को बिताने के लिए,
पूरी है ये दो बातें,
दिल हो जब संचालक तेरा,
धागे उसके दिल से मेरे जुड़ते,
खूबसुरत हो गया है जहान मेरा,
जब से तुम्हें अपनाया मैंने|

हाथों को जब पकड़ा तुमने,
संग तुम्हारे चलना चाहें,
आँखों को जब देखा तुमने,
खूबसुरती इसमें बसना चाहें,
इज़हारे मौहब्बत सुना जब कानो ने,
गूँज ये प्यार की और सुन्ना चाहे,
लबों को जब हसाया तुमने,
होंठो पे तुमको ये सजाना चाहें,
इतनी हसीं हो गयी हूँ मैं,
कि सिर्फ तुझे ही प्यार करना चाहें|

समय की अमीरी नहीं मेरे पास,
चंद साँसें ही हैं,
सात जनम देखे किसने,
ये उम्र ही तुझपे वारा है,
सुख दुख की लकीरें,
खत्म नहीं होती,
कभी हँसना तो कभी रोना है,
मिट्टी में मिल जाए पहले,
ज़िंदगी का स्वाद थोड़ा और लेना है,

मिल जाए कुछ इस तरह,
कि पहचान हमारी बन जाए,
पूछे जो तेरे बारे में,
तो नाम मेरा ही याद आए|

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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