Connect with us

Hope

कुछ तो बता ज़िंदगी

Published

on

बहुत खुश भी हूं और उदास भी,
ग़मगीन भी हूं या ग़मगीन ही,
ज़िंदगी बड़ी बेरुखी सी लगती है,
सब कुछ होके भी खाली सी दिखती है।।

अब क्या कहूं ज़िंदगी से,
कुछ पल का सुकून देकर,
उन सांसो की कीमत चुकानी है,
कल जो भरपूर था आज उसी की तंगी है।।

दिखता जो है वही छलावा है,
अच्छाई में भी कहीं ग़लत ही छुपा है,
रिश्तों में अक्सर दरारें देखी हैं हमने,
टूटे शीशे जुड़ते सिर्फ़ किताबों में है।।

बदलाव का दामन जो पहना,
अस्तित्व ही उतार दिया,
खुशी कैसे मनाऊं हया-ते-जिंदगी,
बदलते इंसान को तूने मौका कहां दिया।।

जज्बातों का एक सागर है,
जहां में डूब रही हूं,
हलचल है इस देह में कहीं,
पर खुद से ही मैं बिछड़ रही हूं,
डर नहीं लगता उफानों से लड़ने का,
भयभीत हूं बस इस बात से सबको पाकर खुद को खोने का।।

कहीं बैठकर सिसक लूं थोड़ा,
जैसी भी हूं पा लूं खुद को थोड़ा,
यह सही ग़लत की दुनिया में,
हर रंग को जी लूं थोड़ा,
बंदिशों में मोहब्बत कहां होती है,
अपने आप से मोहब्बत कर लूं थोड़ा।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Like Us!