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Unrequited love

लफ़्ज़ों की खामोशी

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दिल बेबस हो जाए जब,
तो होंठों को अल्फ़ाज़ नहीं मिलते,
यूहीं नहीं कहते सब,
खामोशी बहुत कुछ बयां करते।।

इज़्तिरार है कितना ये दिल,
जो तू कभी पढ़ ना सका,
तकल्लुफ़ के लिए कहता है,
जो मेरा कभी हो ना सका।।

चाहत मेरी मजबूर हो रही,
फिर से कहीं खोना चाहती है,
कभी उसकी आंखों ने बसाया था,
आज वो आंखें भूल जाना चाहती है।।

दलीलें बहुत है सुनने को,
पर मोहब्बत मौहताज नहीं,
इश्क़ में तेरे तबाह होके,
फिर से मोहब्बत करना गवारा नहीं।।

हाथ पकड़कर कहा होता,
तो भूल जाते तेरी बेवफाई को,
हम तो मुंताज़िर करते रहे,
और वो चल दिए कहीं और को।।

कलम मेरी आज वो कहना चाहती है,
मिट गया जो उसे लिखना चाहती है,
कुछ लोग लफ्ज़ दे जाते है ज़िन्दगी को,
खामोशी कुछ दे जाते है उम्रभर को।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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8 Comments

8 Comments

  1. Charu

    January 9, 2020 at 6:33 PM

  2. Tarun kumar Nath

    January 9, 2020 at 8:40 PM

    So sweet

  3. Vickrant Sharma

    January 10, 2020 at 10:15 AM

    Amazing & awsm Jahnabe

    • Jahnabee

      January 10, 2020 at 10:16 AM

      Thnxx vickrant 🙂

  4. Nikhil

    January 10, 2020 at 10:17 AM

    Nice poem

  5. Nikhil

    January 10, 2020 at 10:18 AM

    Very nice

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