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Intellectual

पायदान

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राहें चाहें जो भी हो,
सबकी अपनी कहानी है,
ग्लानि ना करना देख के अपनी,
इसी का नाम ज़िंदगानी है।।

कुछ मांग ले और भी,
सांसें चाहती है जो जीना,
डगमगा रहे गर तेरे कदम,
इस डर का भी है एक अपना सीना।।

थक जाता है जो तू,
बैठ कर चंद मोहलत बिता,
मंजिल तक पहुंच ही जाएगा,
थोड़ा सफ़र का भी मज़ा उठा।।

ले जाते हैं यह भवसागर,
किनारे जिनके अलग-अलग हैं,
मत छुपा खुद को इन नियमों से,
जिन का टूटना भी बहुत ज़रूरी है।।

कायदे अलग जहां सबके लिए,
फिर क्या सही और क्या ग़लत,
फिक्र होती है ज़ज्बातों को मेरी,
कब उठेगा यह मानवता का नाटक।।

बांधके स्वाधीनता को अपनी,
उसूलों की बातें करता‌ है,
जिंदा है जब तक तू,
क्यों दूसरों की शर्तों पर जीता है।।

अरमानों का भी चोला है,
बदल जाते जो रिश्ते देखकर,
क्यों प्राकृतिक है फिर यह कहना,
जो मिला उसी में खुश रहा कर।।

कायदे में हो, तो क्या सही है?
तर्क किस बात का है,
एक हठ है हम सबके मन में,
समाज ने जो सिखाया,
सिर्फ़ उसी को फरमाया है।।

कानून बहुत है स्वीकृति के,
सबके हिस्से में नहीं आते,
जो दिल की ज़रा सुन लो तो,
नापतोल सब करने लगते।।

जिंदगी के पायदान में कई लोग मिलेंगे,
कुछ रहेंगे कुछ हसेंगे,
बदलाव से‌ न डरना तू,
लोग तो सही में भी गलत ही ढूंढेंगे।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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4 Comments

4 Comments

  1. Nikhil

    February 27, 2020 at 6:10 PM

    Again good one
    Bro
    Good way to describe life

    • Jahnabee

      February 27, 2020 at 6:40 PM

      Thankew so much Nikhil ☺️☺️

  2. vickrant sharma

    February 27, 2020 at 6:12 PM

    proud of you Jahnabee
    Hats off

    • Jahnabee

      February 27, 2020 at 6:40 PM

      Thankew so much Vickrant ☺️☺️

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