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Intellectual

परिवर्तन

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ठहरा हुआ क्या है,
हर कण जो बदल रहा, उसी में दुनिया का वास है,
छोड़ दे रूह जो देह को,
वहीं पर रुक जाए, परिवर्तन एक ऐसा आभास है।

अविरत जो है,
वह बदलाव ही तो है,
सब एक जैसा रहे यह भी तो काल्पनिक है,
जहां पा लेते हैं खुद को थोड़ा और,
वही तो परिवर्तन का परिणाम है।

इस कुम्हार को अपना साथी बना ले,
तेरे सुख और दुख का भागी है यह,
हर कोई छोड़ देता है संगत एक दूसरे की,
जो सांचा रहे वही तो प्रबलता इस घड़े की है।

सह ना पाए जो ताप इसकी,
तो मिल जाए उस माटी में,
ढलता रहे जो हाथों में इसके,
वही तो बहादुरता की निशानी है।

क्यों फिर हम इतना डरते हैं,
क्या इसके छोर से अनजान हैं,
आकार देना चाहते अगर ज़िंदगी को,
अपनाना पड़ेगा इसका जो फ़रमान है।

आसान नहीं हूं वाक़िफ होना,
सोच में खुद को ढाल देना,
परंतु इस तब्दीली को जब देखते हैं,
अपनी ऊर्जा से रूबरू हो जाते हैं।

यकीन हो जाता है थोड़ा और,
विकास का यह पहिया देख कर,
जितना वक्त गुज़रता रहता,
पहुंचा देता यह हमें मंज़र की ओर।

मुश्किल है इसकी स्वीकृति,
पर बहुत कुछ सिखा जाता है,
दिशाहीन इंसान को आगे बढ़ने की,
एक रौशनी दिखा जाता है,
भय से आतुर होकर जो अनुत्तीर्ण हो गए,
कोशिश में अपनी जो विफ़ल भी हो गए,
हृदय को उसका गिला न करने देना,
कई मौके मिलेंगे उस सांचें में ढलने के,
बस अपने मन को परिवर्तित करने की जिज्ञासा को ख़त्म न करना।

इस बदलते दौर के सभी हक़दार हैं,
कोई आशावादी है तो कोई निराश है,
हर किसी में बसती है विशेषता ढल जाने की,
परिवर्तन तो अपने आप में अविनाश है।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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4 Comments

4 Comments

  1. Harinder

    February 4, 2021 at 7:02 PM

    Osam kavita…

  2. Ravinder kaur

    February 4, 2021 at 9:58 PM

    Weldone jahanbee. Your poetry motivated me very much. Thanks for such a good thoughts.

  3. Avinash+Kumar

    February 4, 2021 at 11:02 PM

    Excellent… Simply awesome

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