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Intellectual

सफ़र मुसाफ़िर का

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जीवन के हर्फ को पढ़ते चलें,

तो झोली में मेरी सिफर ही था,

जितना पाया था उसे जी लिया,

और जो खोया तो समझ लिया,

मुसलसल वक़्त था,

बाकी सब रूपांतरण है इस भवसागर का,

अवगत करवाया मुझे सच का,

जीवन है अगर तो वहीं मरण है इंसान का।।

 

मोहब्बत है अगर,

तो कोई नफ़रत भी करेगा,

जीवन है कारवां,

तो कभी तू भी थकेगा,

फूलों की राहें चाहें ना हो,

नियति फिर भी तेरा इंतज़ार करेगा,

धीरे चल ए ज़िन्दगी,

पहलू हयात को हर कोई जीएगा।।

 

लफ़्ज़ों में ना उलझों,

कई पन्ने अभी पलटे नहीं,

हर मोड़ पे एक हसीं सौगात हो,

ये भी ज़रूरी नहीं,

मुमकिन कायनात का हर लफ्ज़ है,

उसे कोई दिल से छुए तो सही,

संग तेरे कोई ना होगा,

परछाई भी हो जाती है जुदा कभी,

सांसें भरले इस कदर,

फिर मलाल ना हो मरने का,

दोबारा क्यों जन्म लेना जीने के लिए,

हर पल को बना अपने जीने की वज़ह।।

 

जो कर सके जहां को मुठ्ठी में,

उसी का फ़लसफ़ा कामयाब है,

हर कोई तुझसे खुश रहें,

ये भी महज़ एक धोखा है,

ए ज़िन्दगी ज़रा धीरे चल,

बहुत रफ़्तार है दुनिया में यूहीं,

कई सवाल है मन में अब भी,

जवाब ढूंढ रही जहान्वी जिनके आज भी।।

 

कायनात की हर चाहत मुमकिन नहीं,

हिस्से में सबके खालीपन भी होगा,

द्वेष से अपने मत घबरा,

जो तेरा है वो तेरा ही होगा,

आंसू जो आए उन्हें पोंछ लें,

थोड़ा दर्द अपना तू भी छलका दें,

मौहताज नहीं सब रिश्ते यहां नाम को,

बेनाम चेहरे भी माइने दे जाते है इस ज़िन्दगी को।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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4 Comments

4 Comments

  1. Charu

    January 30, 2020 at 6:12 PM

    Woah Di, one of my favorite poem among all now.

  2. Ravinder singh

    January 30, 2020 at 7:08 PM

    Very beautiful lines Jahnabee one of the best poems

    • Jahnabee

      January 30, 2020 at 7:08 PM

      Thank you so much Ravinder ☺️

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