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Women Empowerment

सीख गई हूं मैं

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सीख गई हूं मैं,
बिना अवलोकन किए हर बात की सहमति देना,
सीख गई हूं मैं,
नियम रूपी ग्रसित संप्रदाय में चुप्पी धारण करना,
सीख गई हूं मैं,
आंखों में देखते हुए “मैं ठीक हूं बोल देना”
सीख गई हूं मैं,
एक बेटी बहु बीवी के नाम में खुद की पहचान को भूल जाना,

सीख गई हूं मैं,
मासिक दर्द में भी हर रवायत को पूरी करना,
सीख गई हूं मैं,
अपेक्षाएं होते हुए भी घर को संभालना,
सीख गई हूं मैं,
लड़की हूं तो ज़िम्मेदारियां निभाते हुए चलना,
सीख गई हूं मैं,
दरकिनार कर अपनी ख्वाहिशों को सबकी पूरी करना,
सीख गई हूं मैं,
पुरुष प्रधान समाज में दायरें लगा कर चलना,
सीख गई हूं मैं,
दबे होंठ अपनी मोहब्बत का इज़हार करना,
सीख गई हूं मैं,
ग़लत को भी सही कह कर सबके साथ बनाए रखना,
सीख गई हूं मैं,
कही अनकही बातों को समझ लेना,
लगता है कभी कभी क्या इतनी बड़ी हो गयी हूं मैं,
छलकते आंसूओं से जो अपनी बातें करती हूं मैं,
यह साथ क्या होता है सबका,
मेरा अस्तित्व ही दर्पण है मेरा,
जब भी उस नादान लड़की को ढूंढ़ती हूं,
हर किसी में उसे खोया हुआ पाती हूं,
कहती है मुझसे कानों में आके जो,
की अब तो मैं बड़ी हो गयी हूं,
पर फिर भी यूहीं मुस्कुराना चाहती हूं,
जो थक गई तो बैठना चाहती हूं,
परी कहते हो मुझको अगर,
तो खुले आसमान में उड़ना चाहती हूं,
उम्मीदें नहीं है किसी से मुझे,
पर अपनी आज़माईश भी नहीं देना चाहती हूं,
इतना समझ लो मेरी ख्वाहिश को,
लड़की हूं मैं, लड़की ही रहना चाहती हूं।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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4 Comments

4 Comments

  1. Anjna bansal

    January 31, 2021 at 7:12 PM

    Very nice poem

  2. Anonymous

    January 31, 2021 at 7:35 PM

    True madam exactly women life aisy hi hoti h with boundation .

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