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Intellectual

तजुर्बा

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इस दुनिया के रंगमंच पर,
कई तबादले देखे हमने,
अजीज़ थे जो दिल से मेरे,
इक पल में अजनबी बनते देखें मैंने।

हर किसी के अपने गिले होते हैं,
जो दिल को दिल से जोड़ते हैं,
रिश्तें तो वहीं ठहर जाते हैं,
बस हम इस दौड़ में कहीं आगे निकल जाते हैं।

कई बेबाक खामोशियों में लिपटी है ज़िंदगी,
कभी वक्त मिले तो बैठ जाते हैं,
कर्ज़ में कट रही रूह भी हमारी,
जितना भी उतार ले उधार में ही रहते हैं।

जब हकीकत ना बयां कर पाए दर्द तुम्हारे,
तो अथरू को बोलो चुप्पी पहन ले,
सन्नाटे जिंदगी के अक़्सर टकराते हैं,
मौका तुझे भी मिलेगा थोड़ा सब्र कर ले।

बंदिशों में रह गई है अपेक्षाएं,
जो अपनी हदों में तब्दील हो गए,
उड़ते हैं कभी अपने दायरों से जो बाहर,
शाम होते ही पिंजरे में वापस आए।

अनसुनी बातें जो रह जाती हैं,
अक़्सर मैं उनसे बातें कर लेती हूं,
वह भी पूछती है मुझसे बेपरवाह,
छोड़ देते सब मुझे क्या मैं इतनी बुरी हूं।

कभी-कभी लगता है ज़िंदगी के मायने,
लिखे हुए शब्दों में नहीं होते,
कभी-कभी लगता है ज़िंदगी जीने के तौर तरीके,
बनाए समाज के उसूलों पर नहीं चलते,
हर रंग अलग है तजुर्बे का,
बिना चले उस पर सफ़र तय किए नहीं जाते।

यह बहुत कुछ जो होता है,
सही ग़लत में ही सिमट के रह जाता है,
जब तक जीवन को समझने लगते हैं,
सांस छोड़ने का वक्त पास आ जाता है,
फिर लगता है कि काश मौका मिल जाए,
बिना सोचे हम उड़ जाएं,
पर वक्त अपनी गति से मुड़ता नहीं,
आज को जी लो बेपरवाह, दोबारा मौका फिर ना मिल पाए।

तजुर्बे मायने बताते हैं,
आपके अपने होते हैं,
तुलना नहीं हो सकती इसकी लोगों में,
हर किसी के रास्ते अलग होते हैं।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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5 Comments

5 Comments

  1. Anonymous

    January 27, 2021 at 8:08 PM

    Heart touching poetry

  2. Sahil kumar

    January 27, 2021 at 10:10 PM

    great

  3. Sahil kumar

    January 27, 2021 at 10:10 PM

    great.. Very good

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