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विकलांग नागरिकता

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Viklang Nagrikta

कुछ दिनों से कई सवाल चल रहे,
विचलित हूं मैं देखके लोकतंत्र का शासन,
भाईचारा खो चुके हम सब,
फिर भी दे रहें हम एकता का भाषण।।

क्यों आज़ाद हुए हम,
अनुरूपता तो हमारी गुलामी में थी,
जब से स्वतंत्र हुए हैं,
घुस गए है सिर्फ जाती प्रजाति में ही।।

गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता,
सुनके आँखें भर जाती है,
फिर क्यों आम दिनों में हम,
हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौध बन जाते हैं।।

द्वेष है मन में मेरे,
ये कैसा परिवर्तन जो हम लाना चाहते हैं,
खुदके घर जलाके ही,
शायद हम जीत जाना चाहतें हैं।।

योग्यता हमारी भरपूर है,
चाहें आंदोलन हो या धरना,
क्यों फिर हम एकजुट होके,
नहीं जानते भारत को बदलना।।

मंत्री हो या नौकरशाहों की ताकत,
क्यों सब खामोश है इस आगज़नी में,
चुनाव देके हमने इनको,
अर्थ बदला है शांति का।।

कौन सही है कौन गलत,
फैसला क्यों हम करते है,
तरक्की नहीं जिन मुद्दों में,
कैसे उसे हम सही कह सकते है।।

संस्कृति अपनी वो बचा रहें,
जो पूछो तो कहते हैं,
क्या रखा है भारत में,
हम तो बाहर बसना चाहते हैं।।

ये लोकतंत्र का नाच कब खत्म होगा,
इंसान औहदे के लिए नहीं,
सही के लिए लड़ेगा,
कब असलियत में बनेगा मेरा भारत महान,
खुश रह सके जहां हर इंसान।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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32 Comments

32 Comments

  1. Deepak

    December 19, 2019 at 11:19 AM

    सच में बहुत ही अच्छी पंक्तियां है। इस इंसान को कुछ नहीं मिलेगा इस दंगो से, फिर भी ना जाने क्यों मरने मारने को तैयार रहते है।
    Very true lines..

    • Jahnabee

      December 19, 2019 at 12:46 PM

      Thankew so much.. keep blessing me.

  2. Abhishek Kalia

    December 19, 2019 at 11:50 AM

    Great Thoughts

  3. Anonymous

    December 19, 2019 at 12:31 PM

    I can see your growth as a poet Jahnabee.
    Brilliant work

    • Jahnabee

      December 19, 2019 at 12:45 PM

      Thank you so much..

  4. Naveen

    December 19, 2019 at 12:46 PM

    Viklang Nagrita…

    Amazing…
    You touched that beautifully
    Stay blessed:)

  5. Brajesh

    December 19, 2019 at 12:47 PM

    Such a fantastic lines..

    • Jahnabee

      December 19, 2019 at 1:18 PM

      Thankew so much Brajesh..

  6. Charu

    December 19, 2019 at 7:40 PM

    Wow mam
    The way u portrayed current scenario in Delhi is just wow

    • Jahnabee

      December 19, 2019 at 8:06 PM

      Thankew so much charu

  7. Sandhya

    December 19, 2019 at 8:39 PM

    Very nice dear, keep it up

  8. vickrant sharma

    December 19, 2019 at 10:38 PM

    An awsm & very thoughtful lines you are amazing Jahnabee

  9. saurav bansal

    December 20, 2019 at 9:29 AM

    very nice jahanabee.. very apt title in today’s scenario..

  10. Anonymous

    December 20, 2019 at 4:20 PM

    Great views

  11. Ravinder singh

    December 20, 2019 at 7:04 PM

    Awesome words dear.. m proud of u

  12. Shallu

    December 20, 2019 at 8:17 PM

    Very touching poem, Keep it up nd stay blessed always

  13. Sanghamitra

    December 21, 2019 at 12:48 AM

    Very nice jahnu..keep it up

  14. Rajadhiraj nath

    December 22, 2019 at 7:22 AM

    Too good sister. Love from ASSAM # RJ

  15. Avinash Kumar

    January 18, 2020 at 2:22 PM

    Excellent Jahnabee

  16. ปั้มไลค์

    June 2, 2020 at 8:48 AM

    Like!! Great article post.Really thank you! Really Cool.

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