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वो उम्र छोटी सी

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वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब बिना चिंतन के चंचल चितवन,
अपने पंख फैलाए,
नन्हें पैरों से कदम बढ़ाएं,
बिना डरे कि गिर जाए,
देखो वह चलते ही जाए।।

वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब क्रीड़ा अवस्था की अठखेलियों में,
हम ये भूल जाएं,
खेलते रहें इस सुध में,
गंदा होना भी हमें हरा न पाए,
और हंसी बेपरवाह दोबारा गूंजती जाए।।

वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब लाडली घर की हुकुम चलाएं,
भोली भाली आंखों से वो,
अपनी सारी ज़िद्द मनवाएं,
मम्मी जब डांटती उसको,
तो पापा आके फटकार लगाए।।

वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब लड़कपन की मदहोशी में,
बारिशों को महसूस किया है,
हवाओं के संग बहते चले गए,
यौवन के रस को घूट घूट पीया है,
दिल में मोहब्बत थी चंदन जैसी,
आज फिर हमें क्या हुआ है।।

वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब आंसू अपना दर्द बतलाते थे,
हंसी अपनी खुशी जता जाते थे,
दो चेहरे नहीं जहां,
साफ़ दिल हुआ करते थे,
बड़े घरौंदे नहीं ज़्यादा पर,
कच्चे मकानों मे लोग सुकून से रहा करते थे।।

वो उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब नादान ख्वाहिशों में उम्मीदें थी,
लबों की मुस्कान हमेशा खिलती थी,
गुस्ताखियां होती थी हमसे
पर दिल को मलाल नहीं खलती थी।।

वह उम्र छोटी सी वापस आ जाए,
जब मां की गोद में सुकून मिलता था,
भाई से लड़ना भी दिल को नहीं सताता था,
आक्रोश नहीं था ज़ज्बातों में मेरे,
आज उन्हीं को याद करके मन में द्वेष महसूस होता।।

Jahnabee is an Independent working lady, Pet lovers, travel freak, music mind, culinary explorer, an extrovert and at the very core…a poet.

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2 Comments

2 Comments

  1. Avinash Kumar

    April 3, 2020 at 10:38 AM

    Great Jahnabee Devi Ji…. Bachpan achaa tha

    • Jahnabee

      April 3, 2020 at 10:40 AM

      True☺️
      Thankew so much!!

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